कैसे पहचाने की आपका प्रियजन नशे की गिरफ्त में आ गया है ? नशा आदत नहीं, मानसिक बीमारी है | कहीं आप या आपका प्रियजन नशे की बीमारी से ग्रसित तो नहीं ?

  • क्या आपके रिश्तदार या दोस्त आपको नशा कम या बंद करने के लिए कहते है ?
  • क्या आपके परिवार वाले आपको नशा बंद या कम करने के लिए कहते है, तब आपको गुस्सा आता है ?
  • क्या आपको नशा करने के बाद आत्मग्लानि होती है और ऐसा महसूस होता है की शायद नशा नहीं करता तो अच्छा रहता ?
  • क्या आपको कभी दिन की शुरुआत करने के लिए नशे की जरुरत महसूस होती है ?
  • क्या आप नशे के लिए तीव्र इच्छा होने पर स्वयं को रोक नहीं पाते है ?

यदि इनमे से तीन प्रश्नो के उत्तर “हां“ है तो निश्चित ही आप या आपके प्रियजन नशे की बीमारी से ग्रसित हो चुके है | हमें यह बात समझनी होगी की नशा एक मानसिक बीमारी है, जिसमे परिवार मानसिक, आर्थिक, सामाजिक और कभी-कभी शारीरिक रूप से परेशान रहता है |   इस  बीमारी से बाहर  निकलने में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका  होती  है |  इसलिए यह जानना आवश्यक है कि  परिवार को मरीज के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए  जिससे वो नशे की बीमारी से बाहर आ सके  |

परिवार क्या न करे :

  • जब आपका प्रियजन नशा करता है तो परिवार जन समाज में छवि खराब न होने के डर से  उसकी गलतियों पर पर्दा डालते है या उसे अनदेखा करते है जिसके फलस्वरूप यह बीमारी और बढ़ती जाती है |  उसे बताए की ये उसकी गलती है और भविष्य में वो इसे न दोहराए इसका प्रयास करे | यदि फिर भी वो इसे दोहराता है तो किसी विशेषज्ञ से उचित मार्गदर्शन ले |
  • अधिकतर परिवार जन नशा करने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारिओं को अपनी जिम्मेदारी मानकर उसे ये मौका देते है की वो अब स्वतंत्र है,  जिसकी वजह से वो शराब या नशे की तरफ ओर बढ़ता चला जाता है |  जैसे कि पत्नी द्वारा नौकरी या अधिक कार्य करना ताकि वह घर और बच्चो की पढ़ाई का खर्च उठा सके |  ऐसा करने से नशे करने वाले व्यक्ति को अपरोक्ष रूप से बल मिलता है |

परिवार अपने अंदर क्या सकारात्मक परिवर्तन लाए ?

  • नशे की बीमारी के बारे में अधिक से अधिक जाने और मरीज को नशे करने का दोषी न मानते हुए उसका इलाज सही ठंग से करवाए |
  • यदि मरीज नशे में होता है तो उसको समझाने या नशे बंद करने के बारे में बात न करे , जब वो नशे में न रहे उस वक्त उससे नशे के प्रभाव के बारे में बात करे |
  • यदि व्यक्ति मानता है की उसे तकलीफ हो रही है तो उससे पूछे की क्या वो इसका इलाज करवाना चाहता है |
  • मरीज की समस्याओ को जानने के लिए उसके घनिष्ट दोस्तों की मदद ले |
  • जब मरीज नशा नहीं करता है तब उसका समय कैसे  निकलेगा इस बारे में तैयारी रखना परिवार की जिम्मेदारी होती है क्योकि अकेलेपन से वापस नशे की तरफ जाने के स्थिति बनती है |
  • मरीज को समय पर खाना खिलाए और मीठी चीजे कम से कम खिलाए , खाली पेट रहने और मीठा खाने से शराब या नशे करने का मन अधिक होता है |
  • मरीज के साथ एक सकारात्मक रिश्ता बनाए जिससे वो आपसे खुलकर बात कर सके |
  • जब मरीज रिकवरी में होता है तब परिवार की उम्मीद और बढ़ जाती है किन्तु हमें  यह जानना जरुरी है की यह एक बहुत लंबी प्रक्रिया है जिसमे मरीज कई चरणों (स्टेप्स) से होकर गुजरता है और संभव है कि वह  दोबारा नशा भी कर सकता है उस वक़्त परिवार को उम्मीद न खोकर किसी विशेषज्ञ की मदद द्वारा उसका सपोर्ट करना चाहिए  |
  • नशे के खिलाफ इस लड़ाई में परिवार को रोगी से भी अधिक दृढ निश्चय की आवश्यकता होती है  | परिवार को अपने मानसिक स्तर का भी ध्यान रखना आवश्यक होता है जिसके लिए वो अपनी ख़ुशी के कार्य कर सकते है |

प्रवीण श्रीवास्तव

क्लिनीकल साइकोलोजिस्ट

हैप्पी होम रिहैबिलिटेशन, इंदौर

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